उत्तर प्रदेश में बीयर और व्हिस्की मूल्य संरचना
उत्तर प्रदेश में बीयर और व्हिस्की की रिटेल कीमतें मुख्य रूप से चार करों — उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी), मूल्य-वर्धित कर (VAT), अधसंरचना सेस और स्वास्थ्य सेस — के सम्मिलित प्रभाव से निर्धारित होती हैं। उत्पाद शुल्क में स्थिर (प्रति लीटर) और मूल्य-आधारित (EFP का प्रतिशत) दोनों घटक होते हैं, और VAT तथा सेस उत्पाद शुल्क समेत मूल्य पर लागू होते हैं, जिससे अंतिम रिटेल कीमत का अधिकतर हिस्सा करों से बनता है।
1. मूल्य निर्धारण के घटक
हर बोतल बीयर या व्हिस्की की कीमत में निम्नलिखित मुख्य चरण होते हैं:
- एक्स-फैक्टरी मूल्य (EFP):
निर्माता द्वारा तय की गई मूल लागत, जिसमें उत्पादन, पैकेजिंग और मामूली लाभ शामिल हैं। - उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी):
- स्थिर शुल्क – मात्रा के आधार पर निश्चित रुपये प्रति लीटर।
- मूल्य-आधारित शुल्क – EFP का एक प्रतिशत।
ये दरें “उत्तर प्रदेश एक्साइज टैरिफ” में वार्षिक रूप से संशोधित होती हैं।
- VAT एवं सेस:
- VAT – (EFP + उत्पाद शुल्क) का प्रतिशत।
- अधसंरचना सेस – एक्साइज अवसंरचना के लिए प्रति लीटर फ़िक्स्ड लेवी।
- स्वास्थ्य सेस – जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए मूल्य-आधारित लेवी।
अंतिम रिटेल सेलिंग प्राइस (RSP) में विक्रेता का मार्जिन और डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन भी शामिल होता है।
2. बीयर मूल्य संरचना
| घटक | दर / राशि | गणना आधार |
|---|---|---|
| एक्स-फैक्टरी मूल्य (EFP) | ₹100–₹150 प्रति केस (24×330 ml) | निर्माता अनुसूची |
| स्थिर उत्पाद शुल्क | ₹20 प्रति केस | केस के आधार पर तय राशि |
| मूल्य-आधारित उत्पाद शुल्क | EFP का 50% | EFP का प्रतिशत |
| अधसंरचना सेस | ₹3 प्रति केस | प्रति केस फिक्स्ड |
| VAT | (EFP + कुल उत्पाद शुल्क) का 20% | बीयर के लिए मानक दर |
| विक्रेता मार्जिन | (EFP + उत्पाद शुल्क + VAT) का 10% | लाइसेंसधारी द्वारा परिवर्तनीय |
| संकेतित RSP प्रति केस | ₹400–₹550 | सभी घटकों का योग |
उदाहरण: ₹120 EFP वाले केस पर ₹60 मूल्य-आधारित और ₹20 स्थिर उत्पाद शुल्क जोड़ा जाता है, कुल ₹200। 20% VAT ₹40 जोड़ता है, +₹3 सेस; 10% मार्जिन ₹24 जोड़ने पर RSP ≈ ₹267 प्रति केस होता है।
3. व्हिस्की मूल्य संरचना
| घटक | दर / राशि | गणना आधार |
|---|---|---|
| एक्स-फैक्टरी मूल्य (EFP) | ₹800–₹1,200 प्रति लीटर | ब्रांड और आयु श्रेणी पर निर्भर |
| स्थिर उत्पाद शुल्क | ₹250 प्रति लीटर | लीटर के आधार पर तय राशि |
| मूल्य-आधारित उत्पाद शुल्क | EFP का 150% | EFP का प्रतिशत |
| स्वास्थ्य सेस | (EFP + उत्पाद शुल्क) का 10% | चिकित्सा कोष के लिए |
| VAT | (EFP + उत्पाद शुल्क + सेस) का 65% | उच्च मांग के कारण उच्च दर |
| अधसंरचना सेस | ₹5 प्रति लीटर | प्रति लीटर फिक्स्ड |
| विक्रेता मार्जिन | (EFP + उत्पाद शुल्क + VAT) का 12% | मूल्य श्रृंखला जटिलता के अनुसार |
| संकेतित RSP प्रति लीटर | ₹2,500–₹3,800 | सभी घटकों का योग |
उदाहरण: ₹1,000 EFP वाली व्हिस्की पर उत्पाद शुल्क ₹1,750 (₹250 स्थिर + ₹1,500 मूल्य-आधारित) होता है। 10% स्वास्थ्य सेस ₹275 जोड़ता है; ₹2,775 पर 65% VAT ₹1,804 जोड़ता है; +₹5 सेस और 12% मार्जिन (~₹784) जोड़ने पर RSP ≈ ₹4,364 प्रति लीटर होता है।
4. वार्षिक संशोधन और नीतिगत रुझान
- बजट घोषणाएँ: उत्तर प्रदेश का वार्षिक बजट अक्सर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर राजस्व बढ़ाता है; हाल में पेय पर मूल्य-आधारित दरें 5–10 प्रतिशत अंक बढ़ाई गईं।
- क्राफ्ट बनाम मास ब्रांड के लिए श्रेणीगत मूल्य निर्धारण: प्रीमियम/एज्ड व्हिस्की पर उच्च EFP लागू होता है, लेकिन स्थानीय डिस्टिलरी को बढ़ावा देने के लिए कम प्रतिशत दरें दी जाती हैं।
- सामाजिक कल्याण सेस समायोजन: स्वास्थ्य और अधसंरक्षा सेस को महामारी प्रतिक्रिया एवं ग्रामीण विकास कोष के लिए समय-समय पर संशोधित किया जाता है।
5. उपभोक्ता एवं उद्योग पर प्रभाव
– उपभोक्ता मूल्य: ऊँचे संयुक्त कर दरों (अक्सर RSP का 60% से अधिक) के कारण UP में अल्कोहल महंगा होता है।
– उद्योग रणनीति: ब्रांड्स EFP समायोजन करके उच्च मूल्य-आधारित शुल्क को कुशलता से प्रबंधित करते हैं; कुछ छोटे पैक SKU लॉन्च करते हैं ताकि “सुलभ” विकल्प मिल सकें।
– राजस्व उत्पादन: अल्कोहल से होने वाला उत्पाद शुल्क राज्य की गैर-कर राजस्व में 20% से अधिक योगदान देता है।
6. निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में बीयर और व्हिस्की के मूल्य निर्धारण में बहु-परत कर संरचना मुख्य भूमिका निभाती है, जो शराब की खपत नियंत्रित करने और पर्याप्त राजस्व जुटाने के उद्देश्य से डिज़ाइन की गई है। उत्पाद शुल्क—स्थिर और मूल्य-आधारित—अंतिम मूल्य का सबसे बड़ा हिस्सा होते हैं, जिसके बाद VAT और सेस आते हैं। वार्षिक बजट संशोधन, ब्रांड पोजीशनिंग रणनीतियाँ, और सामाजिक लेवी ढांचे इस बाजार को निरंतर आकार देते रहते हैं।]














