भारत के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की सज़ा: भारत और अन्य देशों में कानूनी स्थिति
न्यायपालिका की गरिमा और अदालत की शुचिता बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है। यदि कोई व्यक्ति अदालत की कार्यवाही के दौरान या न्यायाधीश पर हमला करने की कोशिश करता है, तो यह न केवल कानूनी अपराध है बल्कि न्यायालय की अवमानना भी माना जाता है। हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश ने यह प्रश्न उठाया कि ऐसे कृत्य पर कानून क्या कहता है और अन्य देशों में इसकी सज़ा कैसी होती है।
भारत में कानूनी स्थिति
- भारतीय दंड संहिता (IPC) और अब भारतीय न्याय संहिता (BNS)
- IPC 353 / BNS 221: लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए हमला या बल प्रयोग।
- सज़ा: अधिकतम 5 वर्ष की कैद, या जुर्माना, या दोनों।
- IPC 504 / BNS 351: जानबूझकर अपमान करना जिससे शांति भंग हो सकती है।
- सज़ा: अधिकतम 2 वर्ष की कैद, या जुर्माना, या दोनों।
- IPC 506 / BNS 351–352: आपराधिक धमकी।
- साधारण धमकी: 2 वर्ष तक की कैद।
- गंभीर धमकी (मृत्यु/गंभीर चोट/आगजनी): 7 वर्ष तक की कैद और जुर्माना।
- IPC 186 / BNS 184: लोक सेवक को कार्य से रोकना।
- सज़ा: 3 माह तक की कैद, या ₹2,500 तक का जुर्माना, या दोनों।
- IPC 353 / BNS 221: लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए हमला या बल प्रयोग।
- अदालत की अवमानना (Contempt of Courts Act, 1971)
- यदि यह कृत्य अदालत की कार्यवाही के दौरान होता है, तो इसे आपराधिक अवमानना माना जाएगा।
- सज़ा: 6 माह तक की साधारण कैद, या ₹2,000 तक का जुर्माना, या दोनों।
- सुप्रीम कोर्ट के पास संविधान के अनुच्छेद 129 और 142 के तहत विशेष अधिकार भी हैं।
अन्य देशों में उदाहरण
- अमेरिका (George W. Bush, 2008)
इराक़ में एक पत्रकार ने तत्कालीन राष्ट्रपति पर जूता फेंका। उसे 3 वर्ष की सज़ा हुई, लेकिन 9 माह बाद रिहा कर दिया गया। - पाकिस्तान
कई मौकों पर अदालतों और नेताओं पर जूता फेंकने की घटनाएँ हुईं। कुछ मामलों में अदालतों ने कठोर सज़ाएँ दीं, जिनमें लंबी कैद भी शामिल रही। - भारत (पूर्व घटनाएँ)
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर भी जूता फेंकने की कोशिश हुई थी। अधिकांश मामलों में आरोपी को तुरंत हिरासत में लिया गया और अदालत ने इसे गंभीर अपराध माना।
निष्कर्ष
जूता फेंकना केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला है। भारत में ऐसे कृत्य पर BNS और अवमानना कानून दोनों लागू होते हैं, और सज़ा की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या चोट लगी, धमकी दी गई, या अदालत की कार्यवाही बाधित हुई। अन्य देशों में भी इसे गंभीर अपराध माना जाता है और कठोर दंड दिए जाते हैं।

















