एक आदमी विदेश से एक ऐसा कुत्ता खरीद कर लाया
जो बहुत समझदार था
और सिर्फ सूंघकर ही अपने मालिक के सगे-सम्बन्धियों को पहचान सकता था.
घर आते ही आदमी ने कुत्ते को आदेश दिया –
“जाओ और स्कूल से मेरे दोनों बच्चों को लेकर आओ !”
कुत्ता फ़ौरन स्कूल की तरफ दौड़ गया
और काफी देर तक वापस नहीं आया.
जब बहुत ज्यादा देर हो गई तो आदमी को चिंता होने लगी.
उसकी पत्नी हाय-तौबा करने लगी
तो वह खुद कुत्ते और अपने बच्चों को ढूँढने के लिए घर से निकला.
तभी उसने देखा कि सामने से
कुत्ता बच्चों के एक पूरे झुण्ड को घेरे हुए लेकर आ रहा है.
इन बच्चों में से
2 उसकी नौकरानी के,
3 उसके पड़ोसियों के,
1 उसकी साली का और
2 बच्चे उसकी सेक्रेटरी के थे…
पत्नी फनफनाती हुई बोली –
“तो इसका मतलब ये सारे बच्चे तुम्हारे हैं ???”
जवाब में आदमी दहाडा –
“ये तो मैं बाद में बताऊँगा
पहले ये बताओ कि कुत्ता हमारे 2 बच्चों को लेकर क्यों नहीं आया ???”




![Maneka Gandhi v. Union of India [1978] 2 SCR 621: A Watershed Moment in Indian Constitutional Jurisprudence](https://www.infipark.com/articles/wp-content/uploads/2026/02/Image-Feb-18-2026-10_47_59-AM-218x150.jpg)







