जाट को खेत में टयूबवेल लगवाना था !
सोचा कि पंडितजी से पूछ लू कि पानी कहां होगा? ?
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पंडितजी ने सारे खेत में घूम कर एक कोने में हाथ रख दिया और बोला कि यहां टयूबवेल लगा ले? और 1100 रु. ले लिये !
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जाट बेचारा भुरभुरे स्वभाव का था !.?
पंडितजी से बोला: मैं बहुत खुश हूं…आप मेरे घर खाना खाने आओ !
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पंडितने सोचा कि फंस गई सामी आज तो…और हां कर दी !??
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जाट घर जा कर अपनी पत्नि से बोला,”
पंडित??जी जिम्मण आवेंगे पकवान बना ले और एक कटोरी में?
नीचे देसी घी और उपर चावल डाल दिये !
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पत्नि बोली कि घी तो उपर होता है!??
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जाट बोला कि आज तू घी नीचे रखिये !??
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पंडितजी आ गये और चावल वाली कटोरी देख
कर
बोले ,” बेटा इसमें घी तो है ही नहीं !??
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जाट ने चप्पल निकाल के एक धरी पंडित के कान?? के नीचे और बोला,”
तन्नै खेत में 250 फुट नीचे का पानी देख लिया…
कटोरी में 2 इंच नीचे घी नी दिक्खया ??




![Maneka Gandhi v. Union of India [1978] 2 SCR 621: A Watershed Moment in Indian Constitutional Jurisprudence](https://www.infipark.com/articles/wp-content/uploads/2026/02/Image-Feb-18-2026-10_47_59-AM-218x150.jpg)






