CBSE Three-Language Policy 2026 – NEP 2020 और सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के संदर्भ में

साल 2026–27 से CBSE ने अपनी स्कीम ऑफ स्टडी में बड़ी बदलाव करते हुए तीन-भाषा नीति लागू करने का निर्णय लिया है, जिसे National Education Policy (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। इस नीति के तहत कक्षा 9 से छात्रों को तीन भाषाएँ पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ (भारतीय भाषाएँ/भारतीय भाषास) होना अनिवार्य होगा।[2][6][7][1]

NEP 2020 की पृष्ठभूमि और तीन-भाषा फ़ॉर्मूला

NEP 2020 ने पूरे देश में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तीन-भाषा फ़ॉर्मूला की सिफ़ारिश की है। नीति का मूल उद्देश्य है कि हर छात्र कम से कम तीन भाषाएँ सीखे, जिनमें दो भारतीय भाषाएँ हों और एक भाषा क्षेत्रीय या अन्य उपयुक्त भाषा हो।[8][6][9][7]
इस फ़ॉर्मूले के ज़रिए सरकार शिक्षा में भारतीय भाषाओं की स्थिति मज़बूत करना चाहती है, साथ ही छात्रों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता और भाषाई कौशल से समृद्ध करना चाहती है।[6][9]

CBSE की तीन-भाषा नीति 2026 के मुख्य बिंदु

CBSE ने मई 2026 की सर्कुलर और जून 2026 की गाइडलाइंस के माध्यम से स्पष्ट किया है कि कक्षा 9 और 10 में तीन भाषाएँ R1, R2 और R3 के रूप में रखी जाएँगी। इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएँ भारतीय होनी चाहिए; तीसरी भाषा विदेशी भाषा हो सकती है, यदि बाकी दोनों भारतीय भाषाएँ हैं।[10][11][1][2]

महत्त्वपूर्ण बिंदु:

  • तीन भाषाएँ अनिवार्य होंगी – R1, R2, R3।[10][2]
  • R1 और R2 के रूप में भारतीय भाषाएँ चुनना अनिवार्य है; R3 तीसरी भाषा के रूप में भारतीय या विदेशी भाषा हो सकती है, बशर्ते R1 और R2 भारतीय भाषा हों।[11][1][2]
  • तीसरी भाषा (R3) के लिए कक्षा 10 में CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होगी; इसका मूल्यांकन केवल स्कूल-स्तर की आंतरिक परीक्षा से किया जाएगा।[3][1][2][11]
  • भाषा संयोजन में लचीलापन दिया गया है ताकि छात्र पहले से चल रही भाषा पढ़ाई को जारी रख सकें और अचानक बदलाव से बच सकें।[12][1][11]

विभिन्न कक्षाओं पर नीति का प्रभाव

नीति का प्रभाव बैच-वाइज़ और कक्षा-वाइज़ अलग-अलग है, जिसे CBSE ने विस्तार से स्पष्ट किया है।[1][11][10]

कक्षा 10 (शैक्षणिक सत्र 2026–27 के बैच)

  • वर्तमान कक्षा 10 (2026–27) के छात्रों पर नई तीन-भाषा नीति लागू नहीं होगी।[12][1]
  • वे दो भाषाओं वाले पुराने सिस्टम के तहत ही बोर्ड परीक्षा देंगे।[1][12]

कक्षा 9 (सत्र 2026–27 से)

  • इस बैच के लिए तीन भाषाएँ पढ़ना अनिवार्य होगा।[2][10]
  • जो छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएँ पढ़ रहे हैं, वे तीसरी भाषा के रूप में भारतीय या विदेशी दोनों में से कोई चुन सकते हैं।[2][1]
  • जो छात्र एक भारतीय और एक विदेशी भाषा पढ़ रहे हैं, उन्हें तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य रूप से भारतीय भाषा चुननी होगी।[1][2]
  • जो छात्र दो विदेशी भाषाएँ पढ़ रहे हैं, उन्हें एक-बार की ढील दी गई है – वे दोनों विदेशी भाषाएँ जारी रख सकते हैं, लेकिन साथ में एक भारतीय भाषा भी जोड़नी होगी; तीसरी भाषा अभी भी केवल स्कूल-स्तर पर आंतरिक रूप से आंकी जाएगी, बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।[11][12][1]

कक्षा 7 और 8

  • जिन छात्रों ने कक्षा 7–9 में पहले से दो विदेशी भाषाएँ चुनी हुई हैं, उन्हें अनुमति होगी कि वे उसी संयोजन को कक्षा 10 तक जारी रखें।[11][1]
  • इन बैचों के लिए तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल-आधारित आंतरिक परीक्षा से होगा; CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं ली जाएगी।[12][11][1]

कक्षा 6 (सत्र 2026–27 से आगे)

  • NEP 2020 के पूर्ण क्रियान्वयन के तहत, कक्षा 6 से शुरू होने वाला बैच पूरी तरह नई तीन-भाषा नीति के अधीन होगा।[2][11][1]
  • जब यह बैच कक्षा 10 तक पहुँचेगा (संभावित रूप से वर्ष 2030), तब तीसरी भाषा के लिए CBSE बोर्ड परीक्षा भी होगी।[1][2]

सारणी: प्रमुख वर्गों पर लागू नियम (सरल रूप में)

कक्षा/बैच (CBSE)भाषा नियम (संक्षेप में)बोर्ड परीक्षा स्थिति (तीसरी भाषा)
कक्षा 10 (2026–27)केवल दो भाषाएँ, पुराना सिस्टम जारीतीसरी भाषा लागू नहीं, इसलिए कोई परीक्षा नहीं [1][12]
कक्षा 9 (2026–27 बैच)तीन भाषाएँ अनिवार्य; कम से कम दो भारतीय, तीसरी भारतीय/विदेशी [10][2]तीसरी भाषा केवल स्कूल आंतरिक मूल्यांकन, CBSE बोर्ड नहीं [1][2][3]
वर्तमान कक्षा 7–8यदि दो विदेशी भाषाएँ पहले से हैं, वही संयोजन कक्षा 10 तक जारी; भारतीय भाषा जोड़ने पर ढील [1][11]तीसरी भाषा के लिए केवल स्कूल-स्तरीय मूल्यांकन [1][12]
कक्षा 6 बैच (2026–27 से)तीन भाषाएँ पूरी तरह NEP 2020 के अनुसार; कम से कम दो भारतीय भाषाएँ [1][2][11]जब यह बैच कक्षा 10 पहुँचेगा, तीसरी भाषा पर बोर्ड परीक्षा होगी [1][2]

पाठ्यपुस्तक, शिक्षक और व्यवस्थाओं पर CBSE की तैयारी

CBSE ने माना है कि अचानक भाषा नीति बदलने से पाठ्यपुस्तकों और योग्य शिक्षकों की कमी की समस्या आ सकती है, इसलिए कई अस्थायी उपाय सुझाए गए हैं।[3][11][2]

  • जब तक R3 (तीसरी भाषा) की विशेष पाठ्यपुस्तकें तैयार नहीं हो जातीं, कक्षा 9 के लिए कक्षा 6 स्तर की R3 पाठ्यपुस्तक का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है।[11][2]
  • NCERT 19–22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें तैयार कर रहा है ताकि स्कूलों को समय पर सामग्री उपलब्ध हो सके।[3][2]
  • शिक्षक की कमी से निपटने के लिए CBSE ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे Sahodaya क्लस्टर के माध्यम से शिक्षक साझा करें, हाइब्रिड/ऑनलाइन मॉडल अपनाएँ, सेवानिवृत्त शिक्षकों और योग्य पोस्टग्रेजुएट भाषा विशेषज्ञों को नियुक्त करें।[3][2][11]
  • Children with Special Needs (CwSN), विदेशों में स्थित CBSE स्कूलों और कुछ विदेशी छात्रों के लिए तीसरी भाषा में छूट और विशेष प्रावधान रखे गए हैं।[3][1]

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: PIL और अंतरिम आदेश

CBSE की तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की गई हैं, जिनमें अभिभावक, शिक्षक और एक NGO शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि अचानक कक्षा 9 में दो अतिरिक्त भारतीय भाषाएँ अनिवार्य कर देने से छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक और शैक्षणिक दबाव पड़ेगा, खासकर उन छात्रों पर जो पहले से विदेशी भाषाएँ पढ़ रहे हैं या बोर्ड परीक्षा की तैयारी में हैं।[13][5][14]

मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने PIL को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए CBSE और केंद्र सरकार से चार सप्ताह में जवाब माँगा और अगली सुनवाई की तारीखें 15–16 जुलाई के लिए तय कीं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि नीति बिना पर्याप्त परामर्श, पाठ्यपुस्तक उपलब्धता और शिक्षक प्रशिक्षण के लागू की जा रही है, जो गुणवत्ता शिक्षा के संवैधानिक मानकों के विपरीत है।[5][14][13]

अंतरिम राहत से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

जून और जुलाई 2026 की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन-भाषा नीति पर तत्काल रोक लगाने से इंकार कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि “भाषा सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता” और यह मुद्दा विस्तृत सुनवाई के योग्य है, लेकिन फिलहाल नीति के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक की आवश्यकता नहीं दिखती।[4][11][3]

कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि CBSE ने तीसरी भाषा को उच्च-दांव वाली बोर्ड परीक्षा से बाहर रखा है और इसे केवल स्कूल-स्तर की आंतरिक परीक्षा के रूप में रखा है, जिससे छात्रों पर परीक्षा का दबाव अपेक्षाकृत कम रहेगा। साथ ही, अदालत ने केंद्र और CBSE को निर्देश दिया कि वे याचिकाओं पर विस्तृत जवाब दाख़िल करें, जिसमें शिक्षक, पाठ्यपुस्तक और भाषा विकल्प से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर स्थिति स्पष्ट हो।[4][5][3]

छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के लिए व्यावहारिक असर

तीन-भाषा नीति का व्यावहारिक असर अलग-अलग वर्गों पर अलग है, लेकिन कुछ साझा चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।[2][11][1]

  • जिन छात्रों ने पाँचवीं कक्षा से किसी विदेशी भाषा (जैसे French, German, Spanish) में समय और मेहनत लगाई है, उन्हें अब कम से कम दो भारतीय भाषाएँ पढ़नी होंगी, जिसके कारण उनके भाषा संयोजन में बदलाव आ सकता है।[14][5][4]
  • स्कूलों को नई भारतीय भाषाएँ शुरू करने के लिए अतिरिक्त शिक्षक, timetable और पाठ्य सामग्री की व्यवस्था करनी होगी, जो छोटे या संसाधन-सीमित स्कूलों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।[11][2][3]
  • सकारात्मक पक्ष यह है कि छात्रों को अपनी मातृभाषा या अन्य भारतीय भाषाओं में बेहतर दक्षता मिलेगी, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं, कानूनी और प्रशासनिक सेवाओं तथा स्थानीय समाज में संवाद क्षमता बढ़ सकती है।[9][7][6]

निष्कर्ष

CBSE की Three-Language Policy 2026, NEP 2020 और NCF-SE 2023 के अनुरूप भारतीय भाषाओं को मज़बूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके क्रियान्वयन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियाँ और कानूनी बहसें अभी जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नीति पर तुरंत रोक लगाने से इंकार कर दिया है, पर उसने याचिकाओं को गंभीरता से सुनने और CBSE व केंद्र से विस्तृत जवाब माँगने का संकेत दिया है, जिससे आने वाले समय में नीति के कुछ पहलुओं में संशोधन या स्पष्टता संभव है।[6][5][14][4][2][3][11]

छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के लिए अभी सबसे व्यावहारिक रणनीति यह है कि वे अपने भाषा संयोजन, पाठ्यपुस्तक उपलब्धता और स्कूल की आंतरिक परीक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अगले कुछ वर्षों की शैक्षिक योजना सावधानी से बनाएँ, साथ ही सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और CBSE के नए दिशा-निर्देशों पर नज़र रखें।[4][1][2][3][11]


  1. https://www.indiatoday.in/education-today/news/story/cbse-three-language-policy-nep-2020-guidelines-2026-class-x-relief-2936471-2026-06-29                        
  2. https://www.businesstoday.in/india/story/nep-2020-mandate-cbse-introduces-mandatory-3-language-policy-no-board-exam-for-third-language-531844-2026-05-16                      
  3. https://www.indiatoday.in/education-today/news/story/cbse-3-language-rule-sc-refuses-to-pass-order-against-3-language-policy-for-class-9-2929171-2026-06-18           
  4. https://timesofindia.indiatimes.com/india/learning-a-language-never-goes-waste-sc-declines-to-stay-cbses-three-language-policy/articleshow/132389225.cms     
  5. https://www.indiatoday.in/education-today/news/story/supreme-court-asks-cbse-to-clarify-3-language-rule-for-class-9-within-4-weeks-next-hearing-in-july-2917909-2026-05-27     
  6. https://prsindia.org/policy/report-summaries/national-education-policy-2020    
  7. https://www.iitms.co.in/blog/three-language-formula-in-nep-2020.html  
  8. https://www.cbse.gov.in/cbsenew/documents/Press_Release_Three_lang_29062026.pdf
  9. https://www.scribd.com/document/897197050/NEP-2020-pgs-15-16  
  10. https://cbseacademic.nic.in/web_material/Circulars/2026/33_Circular_2026.pdf    
  11. https://www.newindianexpress.com/india/2026/Jun/26/three-language-formula-cbse-allows-existing-class-7-9-students-to-retain-current-language-choices                  
  12. https://timesofindia.indiatimes.com/city/nagpur/cbse-eases-3-language-policy-exempts-current-class-10-batch/amp_articleshow/132079076.cms      
  13. https://www.newindianexpress.com/india/2026/May/22/supreme-court-to-hear-plea-against-cbses-three-language-mandate-for-class-9 
  14. https://timesofindia.indiatimes.com/india/sc-to-hear-pil-against-cbses-3-language-policy/articleshow/131270416.cms   
  15. https://www.youtube.com/watch?v=0O4pidCGHqw